उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। जिसके लिए बीजेपी अपनी तैयारियों को मजबूत कर रही है। बीजेपी चुनाव में जीत हासिल करने की रणनीति पर काम कारी रही है। चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे बड़े सामाजिक-राजनीतिक अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। पार्टी अब गुरु रविदास के समरसता, समानता और सामाजिक सद्भाव के संदेश को केंद्र में रखकर अनुसूचित जाति की 66 उपजातियों तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।
अभियान का क्या उद्देश्य?
बता दें की इस अभियान के जरिए बीजेपी का प्रयास है कि दलित समाज के विभिन्न वर्गों को सामाजिक समरसता, सामाजिक एकजुटता और व्यापक हिंदू समाज के साझा विमर्श से जोड़ा जाए। राजनीतिक हलकों में इसे 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी की सबसे बड़ी सामाजिक इंजीनियरिंग के रूप में देखा जा रहा है।
अभियान चुनावी रणनीति की मजबूत नींव
भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि यह अभियान 2027 की चुनावी रणनीति की सबसे मजबूत नींव बन सकता है। जिसे लेकर बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि गुरु रविदास जयंती से शुरू होकर यह अभियान उनके 650वें प्रकाश पर्व तक चरणबद्ध तरीके से चलेगा।
कैसे काम कर सकती है रणनीति?
उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 4.13 करोड़ से ज्यादा है। दशकों तक इन वर्गों का बड़ा हिस्सा बहुजन समाज पार्टी की राजनीति की रीढ़ माना जाता रहा है। अब भाजपा की रणनीति इन सभी उपजातियों तक अलग-अलग सामाजिक संपर्क स्थापित कर अपना आधार और मजबूत करने का है।
कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र
इससे पहले बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन से पार्टी चुनाव को जीतने का मंत्र कार्यकर्ताओं को दे चुकी है। पार्टी का एक ही नारा है बूथ जीत समझो चुनाव जीता। अब पार्टी यह नई रणनीति से चुनाव में जीत हासिल करने की उम्मीद को और मजबूत करने जा रही है।












