दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अब एक नई व्यवस्था लागू कर दी है। सरकारी अस्पतालों को अब खुद दवाओं और मेडिकल सामान की खरीद करने के निर्देश जारी किए गए है। अब सरकारी अस्पताल खुद दवाओं, सर्जिकल सामान, उपभोग्य सामग्री, उपकरण व अन्य स्वास्थ्य संबंधी वस्तुओं की खरीद करेंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इसे लेकर आदेश जारी किए है। इन आदेशों में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
सरकारी अस्पताल अब खुद करेंगे खरीद
इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक दवाओं को छोड़कर सीपीए के माध्यम से नई खरीद स्थगित रहेगी। जब तक आवश्यक दवाओं के नए रेट कॉन्ट्रैक्ट तैयार नहीं होते, सभी सरकारी अस्पताल अपने विभागाध्यक्षों के माध्यम से आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं, उपभोग्य सामग्री, सर्जिकल आइटम, चिकित्सा उपकरण और अन्य सामान की खरीद खुद ही करेंगे। इसके साथ ही विभाग ने यह भी कहा कि नीति में महत्वपूर्ण बदलाव से जुड़े प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष रखे जाने चाहिए, विभाग स्तर पर अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता। इन आदेशों के अनुसार सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी की ओर से शुरू की गई सभी लंबित और अधूरी निविदाएं, जो अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हुई हैं, तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। अब संबंधित चिकित्सा संस्थानों को इन्हें वापस लेना होगा। हालांकि, पहले से लागू वैध दर अनुबंध और खरीद अनुबंध अपनी अवधि पूरी होने तक जारी रहेंगे।
विभाग से मांगा था जवाब
जब तक केंद्रीकृत खरीद के लिए नया कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता तब तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। बता दें कि हाल में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस दवाओं, चिकित्सीय सामान और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़ी लंबित प्रक्रिया के संबंध में कार्य योजना मांगी गई थी।












