प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026’ को संबोधित किया। प्रतिष्ठित सम्मेलन में भाग लेने पर प्रधानमंत्री मोदी ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान ‘साझा भविष्य’ के महत्व और प्रासंगिकता पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि हाल के वर्षों में जो वैश्विक उतार-चढ़ाव हुआ है उसने यह साबित कर दिया है कि सभी देशों का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। भारत हमेशा इसी भावना के साथ आगे बढ़ा है। यही कारण है कि भारत का जी-20 अध्यक्षता के दौरान मंत्र ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, “साझा भविष्य की यह भावना और इसके साथ जुड़ी जिम्मेदारी 21वीं सदी की दुनिया की कई समस्याओं का समाधान करती है”।
वैश्विक चिंताओं का जिक्र
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास, हथियार के रूप में संसाधनों के उपयोग और बढ़ते अविश्वास पर वैश्विक चिंताओं का भी जिक्र किया। पीएम ने कहा कि 25 करोड़ नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालने का कार्य किया गया है। इसके साथ ही दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाए रखने में भारत ने सफलता हासिल कि है। पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में घोषित ‘सप्तधारा’पर सरकार के ध्यान को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि, “सुधार हमारे लिए कोई मजबूरी नहीं हैं। यह हमारी सर्वोच्च प्रतिबद्धता और दृढ़ विश्वास है”।
पूर्व सरकारों की मानसिकता की आलोचना
अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्तमान आर्थिक माहौल की तुलना अतीत की प्रतिबंधात्मक नीतियों से की और लाइसेंस राज की प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट की अवधारणा को समझाया। पीएम मोदी ने कहा कि उस दौर में कंपनियां अगर निर्धारित सीमा से ज्यादा उत्पादन करती थी तो उन्हें दंडित किया जाता था इसके साथ ही उन्हें माल नष्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। पीएम मोदी ने पूर्व सरकारों की मानसिकता की आलोचना भी की। जो जानबूझ कर कमी बनाए रखती थी ताकि नागरिक उन पर निर्भर रहें। इससे रोजगार सृजन बुरी तरह प्रभावित हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीज़ों की भारी कमी बनी रहे। नागरिकों को अभाव में रखना उनकी सोची-समझी नीति थी।“












