भारत में कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौती, हर दिन 1.70 लाख टन कचरे से 40% का निपटान रहता है अधूरा

देश में अब पहले की तुलना में शहरों में ज्यादा मात्र में कचरा इकट्ठा किया जा रहा है। हालांकि कचरा इकट्ठा जितनी तेजी से हो रहा है उनका उतनी तेजी से निपटान नहीं हो पा रहा है।

प्रदूषण कम करने को पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लक्ष्य में भारत में अब भी कुछ सुधार शेष हैं। देश में अब पहले की तुलना में शहरों में ज्यादा मात्र में कचरा इकट्ठा किया जा रहा है। हालांकि कचरा इकट्ठा जितनी तेजी से हो रहा है उनका उतनी तेजी से निपटान नहीं हो पा रहा है। 5 अगस्त को IGSD और गेटवे रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर दिन लगभग 1.70 लाख टन म्युनिसिपल कचरा इकट्ठा हो रहा है। जबकि इसमें से सिर्फ 1.04 लाख टन कचरे की ही प्रोसेसिंग हो पाती है।

कचरे का सही प्रबंधन नहीं
‘म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इन इंडिया: पॉलिसी एंड टेक्नोलॉजी पाथवेज़ फॉर क्लाइमेट एक्शन’ नाम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो भी बचा हुआ कचरा होता है वो या तो बिना प्रोसेस किए डिस्पोज़ल साइट्स तक पहुँचता है या फिर सरकारी डेटा में दर्ज अंतर में ही रह जाता है।

सुरक्षित निपटान पर फोकस करना जरूरी
रिसर्च के मुताबिक, भारत जितना म्युनिसिपल सॉलिड कचरा पैदा करता है, उसका 90 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा इकट्ठा तो कर लेता है, लेकिन लगभग 40 प्रतिशत कचरा फॉर्मल प्रोसेसिंग तक नहीं पहुँच पाता। रिपोर्ट का कहना है कि इसलिए भारत के कचरा-प्रबंधन प्रयासों में सुधार करने की जरूरत है। सिर्फ शहरों से कचरा इकट्ठा करना ही नहीं बल्कि इससे आगे बढ़कर कचरे को अलग-अलग करने, प्रोसेस करने, मटीरियल रिकवरी और सुरक्षित निपटान पर भी फोकस करना जरूरी है।

उत्पाद और आर्थिक मूल्य होंगे तैयार
वहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारत के म्युनिसिपल कचरे में 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑर्गेनिक मटीरियल का होता है। रिपोर्ट में कम्पोस्टिंग और बायोमेथेनेशन जैसे तरीकों से इस कचरे को बेहतर ढंग से अलग करने और उसका ट्रीटमेंट करने से की बात कही गई है। इससे कचरे की बड़ी मात्रा को डंपसाइट तक पहुँचने से रोका जा सकता है। साथ ही, इससे उपयोगी उत्पाद और आर्थिक मूल्य भी तैयार हो सकते हैं।

रिसर्च में क्या सुधार करने की सलाह?
IGSD के इंडिया प्रोग्राम की डायरेक्टर और गेटवे रिसर्च की प्रेसिडेंट ज़ेरिन ओशो का कहना है कि, “भारत ने कचरा इकट्ठा करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है। लेकिन अब अगला काम यह सुनिश्चित करना है कि जो कचरा इकट्ठा किया गया है, उसे सिर्फ़ घरों के दरवाज़ों से हटाकर डंपसाइट तक न पहुँचाया जाए।” ज़ेरिन ओशो ने कहा कि, “नए कचरे को अलग करने और प्रोसेस करने के तरीके को बदले बिना पुराने डंपसाइट को साफ करने से समस्या फिर से पैदा हो सकती है। भारत को इन दोनों पर एक साथ काम करना होगा। बेहतर कचरा प्रबंधन से शहरों को साफ-सुथरा बनाने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और मीथेन उत्सर्जन में तेजी से कमी लाने का मौका मिल सकता है।”

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