प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना बनी वरदान, दवाओं पर लोगों का जेब खर्च काफी काम

देश में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना से लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है।

देश में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना से लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है। संसद सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने जानकारी देते हुए बताया कि देशभर में अब तक 20 हजार 149 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं। इस प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के जरिए लोगों ने अब तक करीब 45 हजार करोड़ रुपये की बचत की है।

दवाओं पर जेब खर्च काफी काम
लोकसभा में योजना की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के तहत लोगों ने ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब 45 हजार करोड़ रुपये की बचत की है। इससे परिवारों का दवाओं पर अपनी जेब से होने वाला खर्च काफी कम हुआ है।

776 जिलों के लोग उठा रहे लाभ
बता दें की प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के तहत 2 हजार 110 तरह की दवाएं और 315 सर्जिकल सामान, चिकित्सा उपयोग की वस्तुएं और उपकरण उपलब्ध हैं। यह योजना देश के 784 में से 776 जिलों में लागू है। जहां लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

200 दवाओं का रखा जाता है स्टॉक
इस योजना के तहत जन औषधि केंद्रों को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा मांग वाली 100 दवाएं और बाजार में तेजी से बिकने वाली 100 दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने पर जन औषधि केंद्र संचालकों को हर महीने प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

जरूरी दवाएं आसानी से उपलब्ध
जन औषधि केंद्रों के बढ़ते नेटवर्क के जरिए देशभर में सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सुधार किया है। दवाओं की कमी न हो और देशभर में जरूरी दवाएं आसानी से उपलब्ध रहें, इसके लिए लगातार निगरानी की जाती है और जरूरी कदम उठाए जाते हैं।

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