उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इस कदम के तहत समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी होगा। वाहों पांच सर्वोदय विद्यालयों में भी स्मार्ट क्लासरूम की शुरुआत की गई है। बता दें कि सरकार की यह पहल ग्रामीण और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने में अहम साबित होगी।
स्मार्ट क्लासरूम परियोजना का उद्घाटन
दरअसल गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने स्मार्ट क्लासरूम परियोजना का उद्घाटन किया। FIRST ORIGIN NextGen Edutech Pvt. Ltd. के सहयोग से सीएसआर के तहत शुरू की गई इस परियोजना के प्रथम चरण में पांच विद्यालयों में एक-एक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किया गया है। जिसकी कुल लागत 35 करोड़ बताई गई है।
डिजिटल शिक्षा की सुविधा
इसकी जानकारी देते हुए समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 103 सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं। जिनमें से पाँच विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए गए हैं। इनमें गाजियाबाद के निडोरी, बुलंदशहर के बदनौरा, मेरठ के हस्तिनापुर, बरेली और पीलीभीत के विद्यालय शामिल हैं। इन कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड, स्मार्ट पैनल, दो एयर कंडीशनर और वुडेन फ्लोरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा
इस अवसर पर राज्यमंत्री असीम अरुण ने कहा कि स्मार्ट क्लासरूम सिर्फ पढ़ाई के तरीके में बदलाव नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी को आधुनिक तकनीक से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले। सरकार का फोकस अब केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए सक्षम बनाने पर भी दिखाई दे रहा है।
आधुनिक शिक्षा का बढ़ेगा दायरा
फर्स्ट ओरिजिन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुज कुमार वर्मा ने बताया कि परियोजना के दूसरे चरण में चयनित अन्य विद्यालयों में भी स्मार्ट क्लासरूम और ऑनलाइन शिक्षा का विस्तार किया जाएगा। इससे प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थी डिजिटल शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। सरकार की यह पहल शिक्षा में तकनीकी बदलाव के साथ सामाजिक समावेशन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।












