दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, माप-तौल कारोबारियों के लिए लाइसेंस रिन्यूअल की अनिवार्यता खत्म

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पहल के तहत बड़ा फैसला किया है।

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पहल के तहत बड़ा फैसला किया है। जिससे माप-तौल के उपकरणों से जुड़े कारोबारियों को राहत मिली है। इस फैसले के तहत अब माप-तौल के उपकरण बनाने वाले, उनकी मरम्मत करने वाले और डीलरों को प्री-लाइसेंसिंग निरीक्षण से छूट दे दी गई है। दरअसल पहले इन कारोबारियों को लाइसेंस प्राप्त करने से पहले प्री-लाइसेंसिंग प्राप्त करना अनिवार्य होता था।

‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ की व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था के तहत अब लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय कारोबारियों को ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ यानी स्व-प्रमाणन देना होगा। इसके आधार पर ही कारोबारियों के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अब पहले की तरह अनिवार्य भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी।

4 अगस्त को गजट नोटिफिकेशन जारी
दिल्ली सरकार ने हाल ही में दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स, 2011 में संशोधन किया है, जिसके तहत अब उपकरण निर्माताओं, मरम्मत करने वालों और डीलरों को लाइसेंस लेने से पहले अनिवार्य विभागीय निरीक्षण से छूट मिल जाएगी। यह बदलाव ‘दिल्ली लीगल मेट्रोलॉजी अमेंडमेंट रूल्स, 2026’ के माध्यम से लागू किया गया है। इसे लेकर 4 अगस्त 2026 को गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।

सेल्फ-सर्टिफिकेशन पर मिलेगा लाइसेंस
इस नई व्यवस्था के तहत वजन और माप के उपकरण बनाने, उनकी मरम्मत करने या उनका व्यापार करने के इच्छुक आवेदक सीधा सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। इससे लाइसेंस जारी होने से पहले होने वाली लंबी निरीक्षण प्रक्रिया की जरूरत खत्म हो जाएगी।

कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया होगी आसान
दिल्ली सरकार का कहना है कि इस कदम से कारोबारियों को अब राहत मिली है क्योंकि इससे कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी। उन्हें किसी तरह की अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दिल्ली सरकार का यह फैसला दिल्ली में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाए गए सुधारात्मक कदमों का हिस्सा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सेल्फ-सर्टिफिकेशन का मतलब यह नहीं है कि नियमों से छूट दी गई हो। विभाग इसका बाद में किसी भी समय सत्यापन या निरीक्षण कर सकता है। अगर जांच के दौरान कारोबारी की ओर से नियमों के उल्लंघन पाया गया या फिर गलत जानकारी देने का मामला सामने आया तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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