केंद्र सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के तहत करोड़ों लोग जागरूक, जम्मू-कश्मीर में नशीली दवाओं की मांग में कमी

केंद्र सरकार ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत अहम कदम उठाए है।

केंद्र सरकार ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत अहम कदम उठाए है। नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने संबंधी इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों के सेवन की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

जम्मू-कश्मीर में सहायता दे रही केंद्र सरकार
राज्यसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने बताया कि सरकार जम्मू-कश्मीर में उपचार और पुनर्वास सुविधाओं के एक नेटवर्क को सहायता प्रदान कर रही है। इनमें 1 नशा मुक्ति एकीकृत पुनर्वास केंद्र, 3 आउटरीच एवं ड्रॉप-इन केंद्र, 2 समुदाय-आधारित सहकर्मी नेतृत्व वाले हस्तक्षेप कार्यक्रम, 6 जिला नशा-मुक्ति केंद्र और 21 व्यसन उपचार सुविधाएं शामिल हैं।

नशा मुक्ति का उपचार उपलब्ध
जम्मू-कश्मीर में विभाग की ओर से समर्थित केंद्रों में लोगों को नशा मुक्ति का उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। यह उपचार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की संख्या वर्ष 2021-22 में 5 हजार 382 थी। जबकि अब वर्ष 2025-26 में बढ़कर 46 हजार 491 हो गई। वहीं वार्षिक आंकड़ों की बात करें तो इस प्रकार रहे- वर्ष 2022-23 में 27,843 लोगों को उपचार मिला। वर्ष 2023-24 में 36 हजार 588 और वर्ष 2024-25 में 40,546 लोगों को नशा मुक्ति का उपचार मिला।

नशीली दवाओं की मांग में कमी
एनएपीडीडीआर के तहत, मंत्रालय की ओर से राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने संबंधी कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। आईआरसीए, सीपीएलआई, ओडीआईसी और डीडीएसी के संचालन और  रखरखाव के लिए गैर-सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक संगठनों को भी सहायता दी जाती है।  जबकि व्यसन उपचार सुविधाएं स्थापित करने के लिए सरकारी अस्पतालों को सहायता प्रदान की जाती है।

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