SC/ST अत्याचार पीड़ितों के लिए उत्तर प्रदेश को केंद्र से मदद, सात साल में 747.17 करोड़ की मिली केंद्रीय सहायता

केंद्र सरकार सिविल अधिकार संरक्षण (पीसीआर) अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने एक योजना चलाई है।

केंद्र सरकार सिविल अधिकार संरक्षण (पीसीआर) अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने एक योजना चलाई है। केंद्र की इस योजना के तहत, अधिनियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और अत्याचार पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए केन्द्रीय सहायता जारी की जाती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह केंद्रीय सहायता जारी की जाती है।

कुल 747.17 करोड़ रुपये की मिली सहायता
राज्यसभा में मंत्री रामदास अठावले ने जानकारी देते हुए बताया गया कि  उत्तर प्रदेश को भी इस योजना के तहत सहायता जारी की गई है। साल 2019-20 से 2025-26 के बीच कुल 747.17 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता राज्य के लिए जारी की गई है। इस अवधि के दौरान, योजना के अंतर्गत 1 लाख 43 हजार 543 अत्याचार पीड़ितों को राहत प्रदान की गई।

लाखों पीड़ितों को मिला लाभ
मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य को 2019-के दौरान 141.36 करोड़ रुपये जारी किए गए जिससे 23 हजार 866 पीड़ितों को लाभ हुआ। इसके बाद हर साल 2025-26 तक राशि जारी की गई जिससे लाखों पीड़ितों को लाभ मिला है।  

राहत राशि वितरित करने की राज्य की जिम्मेदारी
वहीं मंत्री ने मुआवज़े को लेकर सदन को बताया गया कि मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता जारी करता है। लेकिन योजना के कार्यान्वयन और राहत राशि वितरित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की ही होती है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह जारी की गई केंद्रीय सहायता में से पीड़ितों को दिए गए मुआवज़े की वास्तविक राशि के संबंध में  केंद्रीय स्तर पर डेटा नहीं रखता है।

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